काठमाडौँ - चालु आर्थिक वर्ष २०८०/८१ को पहिलो १० महिनामा वाणिज्य बैंकहरू नाफा आर्जनमा कमजोर स्थितिमा देखिएका छन्। आर्थिक गतिविधि सुस्त हुँदा र खराब कर्जा वृद्धि भएसँगै बैंकहरूलाई ऋण नोक्सानी वापतको प्रावधान बढाउनु परेको कारण नाफा दबाबमा आएको हो। यस अवधिमा सबैभन्दा ठूलो नाफा गिरावट व्यहोरेको बैंक हो – एनआईसी एशिया बैंक।
गत आर्थिक वर्षको सोही अवधिमा २ अर्ब १६ करोड रुपैयाँ खुद नाफा कमाएको एनआईसी एशिया बैंकको नाफा यस वर्ष घटेर मात्र ४७ करोड ८७ लाख रुपैयाँमा सीमित भएको छ। यो ७७.८७ प्रतिशतको भारी गिरावट हो, जुन संचालनमा रहेका २० वटै वाणिज्य बैंकहरूमा सबैभन्दा उच्च गिरावट हो।
अब जानौँ, कुन बैंकले कति नाफा कमाए र कसको नाफा घट्यो ?
**वैशाख मसान्तसम्मको नाफा (रु. करोडमा)
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बैंकको नाम |
आ.व. २०८०/८१ |
आ.व. २०७९/८० |
फरक (प्रतिशतमा) |
|---|---|---|---|
|
एनआईसी एशिया |
४७.८७ |
२१६.३२ |
↓ ७७.८७% |
|
कुमारी बैंक |
५४.८४ |
१६२.२० |
↓ ६६.२८% |
|
सामिना बैंक |
१०८.५० |
१५४.८४ |
↓ २९.९०% |
|
नेपाल एसबिआई |
१३२.०७ |
१३५.९५ |
↓ २.८५% |
|
हिमालयन बैंक |
१३८.८४ |
४५२.९० |
↓ ६९.३४% |
|
सिटिजन्स बैंक |
१५५.६५ |
२०३.३२ |
↓ २३.५१% |
|
माछापुच्छ्रे बैंक |
१९०.६२ |
९५.८९ |
↑ ९८.७४% |
|
लक्ष्मी सनराइज |
१९५.४९ |
१९५.६२ |
↓ ०.०७% |
|
प्रभु बैंक |
२००.८० |
२५२.६५ |
↓ २०.४७% |
|
सिद्धार्थ बैंक |
२०९.९५ |
२०५.७२ |
↑ २.०५% |
|
स्ट्यान्डर्ड चार्टर्ड |
२३८.९४ |
२६६.६४ |
↓ १०.३९% |
|
एनएमबि बैंक |
२५६.९८ |
२३६.८९ |
↑ ८.५५% |
|
प्राइम बैंक |
२६४.९५ |
३२५.९४ |
↓ १८.७०% |
|
नेपाल इन्भेष्टमेण्ट मेगा |
४०२.०३ |
३९४.०३ |
↑ २.०३% |
|
एभरेष्ट बैंक |
३९०.३० |
२९९.५४ |
↑ ३०.१७% |
|
नेपाल बैंक |
३२८.८७ |
५९.०३ |
↑ ४५७.१२% |
|
राष्ट्रिय वाणिज्य |
५१०.४३ |
७३९.५६ |
↓ ३०.९३% |
|
ग्लोबल आइएमई बैंक |
५३५.४८ |
४१२.२२ |
↑ २९.८९% |
|
नबिल बैंक |
५६३.७८ |
५४८.५४ |
↑ २.७९% |
श्रोतः नेपाल राष्ट्र बैंक
समग्र नाफा घट्यो
चालु आर्थिक वर्ष २०८०/८१ को वैशाख मसान्तसम्म २० वाणिज्य बैंकहरूले ४७ अर्ब ७९ करोड रुपैयाँ खुद नाफा कमाएका छन्। यो अघिल्लो वर्षको सोही अवधिको तुलनामा करिब ८२ करोड रुपैयाँले कम अर्थात् १.६७% को गिरावट हो। गत वर्ष अर्थात् २०७९/८० को वैशाखसम्म बैंकहरूले ४८ अर्ब ६० करोड रुपैयाँ नाफा कमाएका थिए ।
समीक्षा अवधिमा १० वाणिज्य बैंकहरूको नाफा घट्दा, बाँकी १० बैंकले भने नाफा वृद्धि गर्न सफल भएका छन्। यद्यपि चालु आर्थिक वर्षमा राष्ट्र बैंकले असल कर्जाको कर्जा नोक्सानी व्यवस्थापन (प्रोभिजनिङ) दर १ प्रतिशतमा झारेको भए पनि, समग्र बजार सुस्तताका कारण बैंकहरूको मुनाफा दबाबमा परेको देखिन्छ।


